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सरकारी बैंकों में नौकरी की लगने वाली है झड़ी, वित मंत्रालय ने मांगा खाली पदों का ब्यौरा

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सरकारी बैंकों में नौकरी की लगने वाली है झड़ी, वित मंत्रालय ने मांगा खाली पदों का ब्यौरा

देश में आने वाले महीनों में सरकारी नौकरियों की बहार आने वाली है. खासकर सरकारी बैंकों में बड़ी संख्या में भर्तियां की जा सकती हैं. इसके लिए केंद्र सरकार ने अपनी ओर से तैयारियां शुरू कर दी हैं. अगर सब कुछ सही रहा तो जल्दी ही सरकारी बैंक विभिन्न खाली पदों की वैकेंसी का नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं और भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं को सुनहरा मौका मिलेगा.

भाग लेंगे बैंकों के बड़े अधिकारी

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों में खाली पदों का जायजा लेने और भर्ती की योजना के बारे में जानने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है. यह उच्च स्तरीय बैठक बुधवार यानी 21 सितंबर को होने वाली है. बैठक में सभी सरकारी बैंकों के प्रमुख हिस्सा लेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि बैठक में सरकारी बैंकों के साथ ही सरकारी वित्तीय संस्थानों के प्रमुख भी उपस्थित रहेंगे. इस बैठक में सभी सरकारी बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों में खाली पदों की समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा मासिक भर्ती योजना की भी जानकारी ली जाएगी.

इस बात की भी होगी समीक्षा

पीटीआई की खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कल होने जा रही उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवाओं के सचिव संजय मल्होत्रा करेंगे. बैठक में आभासी तरीके से सभी बैंकों व वित्तीय संस्थानों का टॉप मैनेजमेंट हिस्सा लेगा. इस बैठक में सभी सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थानों के द्वारा सरकारी ई-मार्केटप्लेस पोर्टल जेम के जरिए की जाने वाली खरीद की भी समीक्षा होगी.

स्पेशल कैंपेन की तैयारियों पर बात

खबर के अनुसार, बैठक में स्पेशल कैंपेन 2.0 को लेकर की गई तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी. यह स्पेशल कैंपेन 2.0 02 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के दौरान आयोजित होने वाला है. इस कैंपेन में स्वच्छता व अन्य इश्यूज पर फोकस किया जाएगा. उक्त अवधि के दौरान सांसदों के रेफरेंस और राज्य सरकारों के रेफरेंस आदि जैसे लंबित मामलों की संख्या को कम किया जाएगा.

ब्रांचेज बढ़े पर स्टाफ कम हुए

यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय हो रही है, जब देश भर में बेरोजगारी एक अहम राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. सरकार भी इस मुद्दे को लेकर हो रही आलोचनाओं के प्रति गंभीर है. इसी कारण सरकार चाहती है कि पर्याप्त संख्या में भर्तियां हों, ताकि उसके ऊपर रोजगार के मौके नहीं देने का आरोप न लग पाए. यह कदम इस कारण भी अहम हो जाता है क्योंकि बैंकों में स्टाफ की कमी की समस्या उत्पन्न हो चुकी है. कई बैंक अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट बैंकों की तुलना में शहरी इलाकों के ब्रांचों में सरकारी बैंकों में कम कर्मचारी हैं. पिछले 10 साल में शहरी ब्रांचों की संख्या 28 फीसदी बढ़ी है, जबकि कर्मचारियों की संख्या कम हुई है.