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जानलेवा साबित हो सकता है फैटी लिवर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके प्रकार, लक्षण और उपचार

GovtvacancyJobs
14 April 2022 4:12 PM GMT
जानलेवा साबित हो सकता है फैटी लिवर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके प्रकार, लक्षण और उपचार
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हर साल 19 अप्रैल को दुनिया भर में वर्ल्ड लिवर डे (World Liver मनाया जाता है। इस दिन को लीवर से संबंधित बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सेलिब्रेट करने के लिए मनाया जाता है।

तो चलिए आज बात करते हैं हमारे शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से लिवर के बारे में। हमारे शरीर में पेट के दाहिनी ओर स्थित लिवर (Liver) यानी यकृत एक महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर की कई गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यह हमारी पाचन प्रक्रिया
(Digestion Process)
को सुचारु रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाता है। बाइल फ्ल्यूड (Bile Fluid) यानी पित्त का निर्माण करता है। शरीर में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल (Controls Glucose Level) में रखता है। टॉक्सिक या विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। यहां हम दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. लोकेश नाथ झा (Dr. Lokesh Nath Jha) से बातचीत कर आपके लिए लेकर आएं हैं फैटी लिवर
(Fatty Liver)
से जुड़ी तमाम जानकारी।

आमतौर पर लिवर में फैट कुछ मात्रा में पहले से ही होता है, जिसका उपयोग शरीर आवश्यकतानुसार करता रहता है। लेकिन आरामपसंद लाइफस्टाइल और अन्य कारणों से यह फैट लिवर सेल्स में जमा होता रहता है। जब यह फैट लिवर के कुल वजन का 5-10 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाता है। तब लिवर में संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है और फैटी लिवर डिजीज हो जाती है। इससे लिवर ठीक से कार्य नहीं कर पाता, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सिस्टम गड़बड़ा जाता है। मेडिकल टर्म में इसे हेपेटिक स्टीटोसिस कहा जाता है।


फैटी लिवर के कारण-प्रकार

पहले यह बीमारी 50-60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होती थी। लेकिन आज के दौर में बिजी और लेजी लाइफस्टाइल, अनहेल्दी फूड हैबिट्स और एल्कोहल-नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन के कारण युवावर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। फैटी लिवर डिजीज दो प्रकार के हो सकते हैं- एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एएफएलडी) और नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी)


एएफएलडी (AFLD)

एल्कोहल यानी शराब पीने से होने वाली बीमारियों में एक फैटी लिवर भी है। इंटरनेशनल रिसर्च के हिसाब से रेग्युलर और लिमिट से ज्यादा एल्कोहल पीने वाले लोग इस कैटेगरी में आते हैं। तकरीबन 80-90 फीसदी एल्कोहलिक लोगों में फैटी लिवर की शिकायत देखने को मिलती है। रोजाना लगभग 30 एमएल से ज्यादा एल्कोहल पीना लिवर के लिए खतरनाक है। एल्कोहल ज्यादा मात्रा में पीने से लिवर खराब हो जाता है और फैट को पचाने में असमर्थ हो जाता है। बैड फैट लिवर सेल्स में जमा होता जाता है और उसे डैमेज करता है।


एनएएफएलडी (NAFLD)

नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज क्रॉनिक लिवर डिजीज का अहम कारण है। यह डिजीज मांसाहारी और वसायुक्त हाई कॉलेस्ट्रॉल डाइट लेने से, जंक फूड का अधिक सेवन करने, किसी बीमारी के कारण लंबे समय तक मेडिसिन खाने, अनियमित दिनचर्या, व्यायाम ना करने, तनाव जैसे कारणों से होती है। 3 में से 1 वयस्क व्यक्ति और अब किशोर वर्ग के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। ओवरवेट और डायबिटीज का शिकार लोगों में यह ज्यादा देखने को मिलती है। फैटी लिवर के लक्षण


हालांकि शुरुआत में फैटी लिवर की पहचान आसानी से नहीं हो पाती है। काफी समय बाद शरीर में कई तरह के बदलाव दिखते हैं जो फैटी लिवर का संकेत देते हैं-

  • लिवर में सूजन से उसका आकार बढ़ जाता है।
  • पेट का आकार बढ़ने लगता है।
  • मोटापा होना।
  • पेट के दाहिने हिस्से में ऊपर की ओर दर्द रहना।
  • सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में सांस फूलना।
  • भूख कम लगना, बदहजमी होना।
  • चिड़चिड़ापन होना।
  • आलस, थकान और कमजोरी महसूस करना।
  • अधिक भार से पैरों में सूजन होना।
  • त्वचा के रंग में पीलापन होना।

रिस्क फैक्टर्स

  • एल्कोहल का अधिक सेवन करने वाले लोग।
  • मोटापे का शिकार लोग।
  • टाइप 2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल वाले मरीज।
  • एंटी डिप्रेशन मेडिसिन, एस्पिरीन, स्टेरॉयड, टैमोक्सिफेन जैसी मेडिसिन का ओवरडोज लेने वाले लोग।

कैसे होता है डायग्नोस

डॉक्टर फिजिकल एग्जामिन करके और मरीज की केस हिस्ट्री के आधार पर डायग्नोसिस करते हैं कि फैटी लिवर है या नहीं। इसके अलावा डॉक्टर रूटीन ब्लड टेस्ट कर लिवर एंजाइम चेक करते हैं। अगर एंजाइम सामान्य से अधिक है तो फैटी लिवर की आशंका रहती है। अल्ट्रासाउंड से लिवर में जमे फैट का अंदाजा लगाया जाता है। निडल से लिवर बॉयोप्सी कर फैटी लिवर के कारण को एग्जामिन करते हैं।


हो सकता है ऑटोरिपेयर

लिवर में फैट के अधिक जमाव से वह सिकुड़ कर डैमेज होने लगता है और लिवर सिरोसिस की स्थिति में पहुंच जाता है। बहुत ज्यादा नुकसान होने या इसकी 75 प्रतिशत कोशिकाएं डैमेज होने पर यह काम करना बंद भी कर देता है, जिसे लिवर फैल्योर की स्थिति कहा जाता है। इसमें मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ता है। लेकिन लिवर में खुद को रिपेयर करने की अद्भुत क्षमता होती है। इस खासियत के चलते पेशेंट अगर डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों पर ध्यान दे तो फैटी लिवर की समस्या से छुटकारा पा सकता है।


उपचार-बचाव

हालांकि फैटी लिवर का तब तक कोई परफेक्ट ट्रीटमेंट, मेडिसिन या सर्जरी नहीं है, जब तक यह बढ़ कर सिरोसिस का रूप ना ले ले या फिर लिवर ट्रांसप्लांट की नौबत ना आ जाए। डॉक्टर मरीज को अपने लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतों में बदलाव लाकर फैटी लिवर डिजीज के रिस्क फैक्टर्स को कम करने की सलाह देते हैं। रिवर्स कंडीशन में जाने की खूबी के चलते लिवर बचाव के समुचित कदम उठाने से सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है। इसके लिए यहां बताई जा रही बातों पर अमल करें।


  • एल्कोहल और स्मोकिंग का सेवन बंद करें।
  • मोटापा या वजन धीरे-धीरे कम करें। नियमित योगा, एक्सरसाइज, एरोबिक्स या ब्रिस्क वॉक करें।
  • अपने मनपसंद गेम्स खेलें, स्विमिंग या साइकलिंग करें।
  • कॉलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर लेवल को कंट्रोल करें।
  • ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करें।
  • न्यूट्रीएंट्स से भरपूर बैलेंस डाइट लें।
  • आहार में फाइबर युक्त चीजें जैसे-ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज ज्यादा मात्रा में शामिल करें।
  • शर्करा युक्त चीजें, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक्स, जूस या सेचुरेटिड फैटी एसिड से भरपूर खाद्य कम लें।
  • ऑयली या हैवी डाइट से परहेज करें।
  • फास्ट फूड या जंक फूड खाने से बचें।
  • आइसक्रीम, मिल्क शेक, फ्रूट क्रीम जैसी चीजें कम मात्रा में लें।
  • गैरजरूरी मेडिसिन और स्टेरॉयड खाने से बचें। डॉक्टर से कंसल्ट करके ही मेडिसिन लें।


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