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इन औषधिय पौधो से किसान कमा सकता है लाखो रूपए के साथ साथ स्वास्थ्य लाभ भी

GovtvacancyJobs
22 April 2022 4:55 AM GMT
इन औषधिय पौधो से किसान कमा सकता है लाखो रूपए के साथ साथ स्वास्थ्य लाभ भी
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खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसान परंपरागत खेती को छोड़कर औषधीय खेती का विकल्प अपना सकते हैं इससे कम लागत में करोड़ों रुपए का मुनाफा हो सकता है।

खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसान परंपरागत खेती को छोड़कर औषधीय खेती का विकल्प अपना सकते हैं इससे कम लागत में करोड़ों रुपए का मुनाफा हो सकता है।

किसानों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय औषधीय पौधों की खेती हुई है। इन पौधों की खास बात ये है कि इनका दवा बनाने के साथ-साथ अन्य कई अन्य कई जरूरी कार्यों में उपयोग किया जाता है।

इसके अलावा कम लागत में इन औषधीय फसलों की अच्छी कीमत मिल जाती है। किसानों में भी औषधीय पौधों की खेती के प्रति जागरूकता देखी जा रही है।

मध्य प्रदेश के आगर जिले के लिंगोड़ा, मलवासा एवं तनोडिया के आसपास के कई गांवों में अश्वगंधा एवं अन्य औषधीय फसलों की खेती किसानों द्वारा की जा रही है


लागत कम मुनाफा अच्छा

मध्य प्रदेश के किसानों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय औषधीय पौधों की खेती में अश्वगंधा की खेती लोकप्रिय हो रही है। इन पौधों की खास बात ये है कि इनका दवा बनाने के साथ-साथ अन्य कई जरूरी कार्यों में उपयोग किया जाता है। आगर जिले के ग्राम लिंगोड़ा निवासी किसान बाबूलाल ने बताया कि कम लागत में इन औषधीय फसलों की अच्छी कीमत मिल जाती है। इनकी मांग देश-दुनिया में बरकरार रहती है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि किसान इन पौधों की खेती की तरफ बहुत तेजी से आकर्षित हुए हैं।

अश्वगंधा की खेती

यह एक झाड़ीदार पौधा होता है, जिसके फल, बीज और छाल के उपयोग से कई दवाइयां बनाई जाती हैं। इसकी जड़ से अश्व जैसी गंध आती है, इसलिए इसे अश्वगंधा कहते हैं। इसके उपयोग से तनाव और चिंता को दूर किया जा सकता है। इसकी खेती में खास बात यह है कि इसके जड़ और पत्ते डंठल सभी बिकते हैं।


लेमनग्रास की खेती

इसे आम भाषा में नींबू घास कहा जाता है। पशु इस फसल को खाना नहीं पसंद करते हैं। इसकी रोपाई के बाद सिर्फ एक बार निराई करने की जरूरत पड़ती है, तो वहीं सिंचाई भी साल में 4 से 5 बार ही करनी पड़ती है। एक बार फसल लगाने के बाद 4-5 साल तक इस फसल से मुनाफा हासिल किया जा सकता है।

अकरकरा की खेती

आयुर्वेद की दवाओं को बनाने में अकरकरा के डंठल का उपयोग बड़े स्तर पर किया जाता है। इसके बीज डंठल की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में बाजार में इसकी एक किलो लकड़ी तकरीबन 300-400 रुपये तक में बिक जाती है।

सहजन की खेती

सहजन उपयोग सब्जी और दवा बनाने में होता है। देश के अधिकतर हिस्सों में इसकी बागवानी की जा सकती है। इसका पौधा एक बार लगाने पर कई सालों तक मुनाफा कमाया जा सकता है।


सतावर की खेती

सतावर को शतावरी भी कहा जाता है। किसान इसकी खेती से काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं। सतावर की खेती एक एकड़ में करके 5 से 6 लाख रुपए कमा सकते हैं। कई सारी दवाओं को बनाने के लिए इसके डंठल और पत्तों का उपयोग किया जाता है।

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