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यूक्रेन संकट के चलते इस देश ने की गेंहू को लेकर भारत के साथ बड़ी डील,बढ़ सकते है भाव

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16 April 2022 1:34 AM GMT
यूक्रेन संकट के चलते इस देश ने की गेंहू को लेकर भारत के साथ बड़ी डील,बढ़ सकते है भाव
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अफ्रीकी देश मिस्र ने भारत को गेहूं सप्लायर के रूप में मंजूरी दी है। मिस्र गेहूं का बहुत बड़ा आयातक है, लेकिन अबतक वह रूस और यूक्रेन से ही गेहूं खरीदता था।

अब उसने भारत से गेहूं मंगवाने का फैसला किया है। खाद्यान निर्यात की दिशा में यह भारत के लिए बहुत ही अच्छी खबर है और खासकर देश के किसानों के लिए यह बहुत ही ज्यादा फायदे का सौदा साबित होने वाला है। इसी साल मिस्र भारत से 10 लाख टन गेहूं खरीद करना चाहता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से कहा था कि अगर विश्व व्यापार संगठन अनुमति देता है तो अपनी 80 करोड़ आबादी को मुफ्त राशन देने वाला भारत दुनिया को खाद्यान आपूर्ति करने के लिए तैयार है।

शुक्रवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अफ्रीकी देश मिस्र ने भारत को गेहूं के सप्लायर देश के तौर पर मंजूरी दे दी है। मिस्र, यूक्रेन और रूस से गेहूं खरीदने वाला सबसे बड़े आयातकों में से एक है। लेकिन, रूस और यूक्रेन के बीच जारी लड़ाई की वजह से विश्व बाजार में गेहूं की उपलब्धता पर बहुत ही ज्यादा असर पड़ा है। ये दोनों ही देश गेहूं के प्रमुख उत्पादक होने के साथ-साथ प्रमुख निर्यातक भी हैं। 2020 में मिस्र ने रूस से 180 करोड़ डॉलर का और यूक्रेन से 61.08 करोड़ डॉलर का गेहूं आयात किया था।


यह अफ्रीकी देश भारत से 10 लाख टन गेहूं आयात करना चाहता है, जिसमें से उसको 2,40,000 टन गेहूं की इसी अप्रैल में आवश्यकता है। पीयूष गोयल ने इसके बारे में ट्वीट करके बताया है कि 'भारतीय किसान दुनिया को खिला रहे हैं। मिस्र ने भारत को गेहूं सप्लायर के रूप में मंजूरी दे दी है। दुनिया विश्वसनीय स्थिर खाद्य आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है, तो मोदी सरकार उस दिशा में कदम बढ़ा रही है। हमारे किसानों ने सुनिश्चित किया है कि हमारे अन्न भंडारों से भी ज्यादा अनाज हों और हम दुनिया की सेवा के लिए तैयार हैं।'


गेहूं निर्यात में देश ने कितनी तरक्की की है, इसका अंदाजा लगाने के लिए एक ही आंकड़ा काफी है। अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक भारत ने 170 करोड़ डॉलर का गेहूं निर्यात किया था। इसी अवधि में एक साल पहले सिर्फ 34.017 डॉलर का निर्यात हुआ था। 2019-20 में भारत ने कुल 6.184 करोड़ डॉलर का गेहूं बाहर भेजा था, जो कि साल 2020-21 में बढ़कर 54.967 करोड़ डॉलर का हो गया था।


अभी तक भारत सबसे ज्यादा गेहूं अपने पड़ोसी मुल्कों को ही सप्लाई करता था, जिसमें मात्रा और मूल्य दोनों हिसाब से 2020-2021 में बांग्लादेश का हिस्सा सबसे ज्यादा था, जो कि 54 फीसदी से भी अधिक था। 2020-21 में भारत से गेहूं खरीदने वाले टॉप 10 आयातकों में बांग्लादेश, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, यमन, अफगानिस्तान, कतर, इंडोनेशिया, ओमान और मलेशिया शामिल हैं।


हालांकि, विश्व के गेहूं निर्यात में भारत का योगदान 1 फीसदी से भी कम है। वैसे इसमें पिछले वर्षों में लगातार इजाफा हुआ है। मतलब, 2016 में गेहूं निर्यात में भारत का हिस्सा सिर्फ 0.14 फीसदी था, जो कि 2020 में बढ़कर 0.54 फीसदी पहुंच गया। वैसे जहां तक उत्पादन की बात है तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है और 2020 में विश्व के गेहूं उत्पादन में इसका हिस्सा करीब 14.14 फीसदी था।


भारत में हर साल करीब 10.759 करोड़ टन गेहूं का पैदावार होता है, लेकिन इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा देश में ही खपत हो जाता है। देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और गुजरात शामिल हैं।


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